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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

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सोनी गुप्ता

Abstract Inspirational

हवा बन बह जाने दो

हवा बन बह जाने दो

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इन हवाओं को 

एहसासों की तरह बह जाने दो

अपने दायरे को भूल 

चौखट तो पार कर जाने दो

आज रोको ना इनको 

आज इन्हें बह जाने दो

इसे सहजने का जतन 

तुम क्यों करते हो? 

इन हवाओं को 

एहसासों की तरह बह जाने दो


इन हवाओं को कैद कर 

इनका पतन तो न करो

जरूरत समझो इनकी 

इस तरह इन्हें शमन न करो

आज अपने हिस्से की खुशियाँ 

इसे समेट लेने दो

आज रोको ना इनको 

आज इन्हें बह जाने दो


ज्ञात है अपनी दिशा 

थोड़ा अपनी मन की करने दो

होड़ नहीं है सब कुछ पाने की 

फिर भी जिद है बहने की

अपने दिशा से इसे 

थोड़ा सा आगे बह जाने दो

आज रोको ना इनको 

आज इन्हें बह जाने दो


ऐसे बहने दो जैसे 

एक भीनी महक सी उठती है

बारिश की बूंदों संग मिलकर 

अंतर्मन को बहुत कुछ कहती है

ऊपर उठकर 

हवा का झोंका बन उड़ जाने दो

आज रोको ना इनको 

आज इन्हें बह जाने दो


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