STORYMIRROR

Modern Meera

Drama

4  

Modern Meera

Drama

होठ के रंग

होठ के रंग

1 min
376

हाय कौन सा रंग भर गए

मोहन हमारे होठ में

आईना चुप हो गया है

सखियाँ गयी सब रूठ के


धो धो के, पोंछ पोंछ कर

थक के अब मैं हारी रे

अब तो सारे जग ने जानी

मैं श्याम, तोरी बावरी रे


किस जन्म का बैर है जो

इतना सताते हो हमें

बांसुरी की धुन पे लाखों

रतियाँ जगाते हो हमें


मारे जलन उस बांसुरी के

अब मरी जाती हूँ रे

होठ पर तुझको धरे

तेरी हुए जाती हूँ रे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama