Surendra kumar singh
Romance
मन होलियाना था
सामने गोरी थी
डालना था रंग डाल दिया आंख
अधर सुर्ख गुलाब से
आंख नील समुन्दर
उरोज उत्तुंग हिमालय
नाभि पूरी कायनात
रंगना था उसको
रंग गये उसमें।
जीवन का आधार
संवाद 3
एक पल
तुम्हारे आगोश...
चलते चलते
तुम्हारा होना
एहसास
आज
चलो
जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना। जब मौत अपनी गोद में रख लेगी मेरा सिर तुम मेरे पैरों के पास बैठ जाना।
तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो। तमस सकल जन हृदय का तुम, प्रिये! हर पल हरती हो।
अभियुक्त तुम इस जीवन की, आत्महंता लालसायें। अभियुक्त तुम इस जीवन की, आत्महंता लालसायें।
दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया ! दूरी कब महसूस हुई है , पल पल साथ निभाया !
शहर में तुम्हारी गंध फैली है अभी भी हर आयोजन में। शहर में तुम्हारी गंध फैली है अभी भी हर आयोजन में।
बस तुम यूं ही आ जाना...। बस तुम यूं ही आ जाना...।
राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए। राधिका रचाए रास कान्हा की याद में, निर्मोही हुए कान्हा सुध भी लेने ना आए।
है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।। है वह नारी, जो सब पर भारी वो हम सबकी मां है प्यारी।।
एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।। एक गीत अपनी मोहोब्बत के लिए।।
प्रेम सुधा की प्यासी राधा ताप बिरह का कैसे सहे। प्रेम सुधा की प्यासी राधा ताप बिरह का कैसे सहे।
वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं। वेदना अंतस में गहरी फिर भी अश्रु गा रहे हैं।
मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था... मैं बन जाती थी आसमान, वो तारा बनकर मुझमें बिखर जाता था...
इश्क़ को बस यही दीवानगी यही सुकून चाहिए। इश्क़ को बस यही दीवानगी यही सुकून चाहिए।
हैं तेरे बारे में तो बात बहुत , और कुछ मेरी अपनी बीती है ।। हैं तेरे बारे में तो बात बहुत , और कुछ मेरी अपनी बीती है ।।
आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ जाओ। आम्र कुंज सब गए बौर से, और न देन लगाओ , फागुन का महीना है आया, प्रियतम घर आ ज...
पर्व आधुनिक प्रेम का, वैलिन्टाइन नाम। हमने भी विधिवत किया, एक एक सब काम।। पर्व आधुनिक प्रेम का, वैलिन्टाइन नाम। हमने भी विधिवत किया, एक एक सब काम।।
गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर... गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...
मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास... मैं मचलती हूँ सात सुर-सी बजती वीणा-सी, कोई नश्तर नहीं मेरे वज़ूद के आसपास...
कुंद...सेमल...हरसिंगार...पलाश इन लताकुंजों को है तुम्हारी तलाश। कुंद...सेमल...हरसिंगार...पलाश इन लताकुंजों को है तुम्हारी तलाश।
इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन ! इन दिनों अकुलाया बौराया सा है मन , प्रिय के आलिंगन को तत्पर है बदन !