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Surendra kumar singh

Romance

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Surendra kumar singh

Romance

होलियाना

होलियाना

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मन होलियाना था

सामने गोरी थी

डालना था रंग डाल दिया आंख

अधर सुर्ख गुलाब से

आंख नील समुन्दर

उरोज उत्तुंग हिमालय

नाभि पूरी कायनात

रंगना था उसको

रंग गये उसमें।



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