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भाऊराव महंत

Tragedy

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भाऊराव महंत

Tragedy

होली दोहा 01

होली दोहा 01

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होली अब सिन्दूर की, खेल रहे कुछ लोग। 

जिसके कारण स्त्रियाँ, पातीं रहीं वियोग।।




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