भाऊराव महंत
Drama
होली के त्यौहार में,
भले लगाओ रंग।
किन्तु अधिक मधपान कर,
करो नहीं हुड़दंग।
होली दोहा
आज हम होली मे...
होली दोहा 05
होली दोहा 03
होली दोहा 01
होली हाइकू
होली कुंडलिया...
आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ? आंखों में नीर भी कह रहा ये शहर इतना झूठा क्यों है ?
मुझे जैसी छोटी बच्ची को जो गम दिखी वो उन बड़े लोगों को क्यों न दिखी ! मुझे जैसी छोटी बच्ची को जो गम दिखी वो उन बड़े लोगों को क्यों न दिखी !
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?' पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?'
महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है। महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है।
या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ? या खुदगर्ज बनके किया खुद से ही प्यार क्या मैं वहां गलत थी ?
सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत। सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत।
आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।। आज लहू से मन की गाँठें, धीरे-से खोल रहा हूँ।।
मैं शीतल हूँ और चंचल भी, माँ के दिल का चैन भी हूँ, मैं गर्ला हूँ और चपला भी, मैं क्रोधित जलते नैन... मैं शीतल हूँ और चंचल भी, माँ के दिल का चैन भी हूँ, मैं गर्ला हूँ और चपला भी, ...
कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में। कभी अपने घर में और कभी बेटे बहू के घर में।
अपने दिल की हर एक बात मुझसे ही तो साझा करती है कहने को तो रिश्ता बस दोस्ती का है अपने दिल की हर एक बात मुझसे ही तो साझा करती है कहने को तो रिश्ता बस दोस्ती...
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
सो कर उठने पर लगता है सपना है शायद सो कर उठने पर लगता है सपना है शायद
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे। बच्चों को अच्छा इन्सान बनाऐंगे। हर परिस्थिति का सामना करना सिखायेंगे।
कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना। कभी समय मिले तो, घड़ी दो घड़ी, बेटा, मिलने आते रहना।
आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे, आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे,
इस माटी में लावण्य-लालित्य ललना के सिंदूर हैं, शोक-विलाप करती विधवाओं के क्रंदन भरपूर इस माटी में लावण्य-लालित्य ललना के सिंदूर हैं, शोक-विलाप करती विधवाओं के क्रं...