STORYMIRROR

Ajay Prasad

Drama

3  

Ajay Prasad

Drama

हो जाए

हो जाए

1 min
192

बस इक दुआ कबूल हो जाए

फ़िर चाहे सब फिजूल हो जाए ।


जो ढा रहे हैं ज़ुल्म मजलूमों पर

ज़िंदगी उन की बबूल हो जाए ।


मदद न सही तो मक्कारी भी नहीं

अमीरों का बस ये उसूल हो जाए।


भटक रहे हैं लोग बदहवास जहां में

या खुदा और एक रसूल हो जाए


मूंद लूँ मैं आँखें इत्मीनान के साथ

गर मेरी ये इल्तिज़ा कबूल हो जाए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama