Khalid MOHAMMED
Drama
नजरिया बदलते ही
नजरिया बदल जाता है,
नज़रिये नज़रिये से भी
हमारी नज़र से जब
तुम देखोगे उन्हें,
देखो कैसे तुम्हारा भी
नजरिया बदल जाता है !
महंगाई
ज़िन्दगी
उलझन
मैं और मेरी प...
हमारी नज़र !
तस्वीर
वतन से कुछ न ...
किताब!
बेवफाई
ज़रूरी है!
एक औरत में कितनी सारी औरतें न जाने किस हाड़माँस से बनी होती है औरतें। एक औरत में कितनी सारी औरतें न जाने किस हाड़माँस से बनी होती है औरतें।
जिसने भीतर जोत जलाई, घनी निशी में जिसने भीतर जोत जलाई, घनी निशी में
आमंत्रित करेगा या शून्य से निकल शून्य में तिरोहित हो जायेगा।। आमंत्रित करेगा या शून्य से निकल शून्य में तिरोहित हो जायेगा।।
"मुरली" तेरा ईस्तकबाल कर के मै, तुझे बांहों में समाने का सोच रहा हूं। "मुरली" तेरा ईस्तकबाल कर के मै, तुझे बांहों में समाने का सोच रहा हूं।
जिसने थामी, मौन तलवार उसने पाया साहिल, हर बार। जिसने थामी, मौन तलवार उसने पाया साहिल, हर बार।
जो देखता रहा, वो फंसा रहा बीच, मंझधार। जो देखता रहा, वो फंसा रहा बीच, मंझधार।
हर मकसद को मिले उसकी मंजिल सही ! हर मकसद को मिले उसकी मंजिल सही !
ऑनलाइन ही लड़ना और झगड़ना, भी खूब हो जाता है , ऑनलाइन ही लड़ना और झगड़ना, भी खूब हो जाता है ,
समाज के कुरीतियाँ भागता , खोखलापन के सम्मान बचता समाज के कुरीतियाँ भागता , खोखलापन के सम्मान बचता
दे दो, मुझे भी सत्य पथ पर चलने की लगन जय हो आपकी,परशुरामजी जमदग्नि नंदन। दे दो, मुझे भी सत्य पथ पर चलने की लगन जय हो आपकी,परशुरामजी जमदग्नि नंदन।
बस इतना सा जतन कर लो, वो पाँच दिन सहन कर लो। बस इतना सा जतन कर लो, वो पाँच दिन सहन कर लो।
ऐसे लोग तो उजाले में भी अंधेरे की भूल रहे। ऐसे लोग तो उजाले में भी अंधेरे की भूल रहे।
तुम खोलती मेरी उलझनों के तालों को। तुम खोलती मेरी उलझनों के तालों को।
धन्य है, मेवाडी माटी जिससे निकला, सूर्य हिंदुस्तान का।। धन्य है, मेवाडी माटी जिससे निकला, सूर्य हिंदुस्तान का।।
इसबार वोट डालने, जाये सब ही नर-नार मताधिकार प्रयोग से, बनाये सुदृढ़ सरकार। इसबार वोट डालने, जाये सब ही नर-नार मताधिकार प्रयोग से, बनाये सुदृढ़ सरकार।
मेरी कहानी पढोगे ? मैं तिश्नगी के कुछ अफ़साने बतलाऊंगा मेरे साथ बैठोगे ? मैं कहानियां सुनाऊंगा | मेरी कहानी पढोगे ? मैं तिश्नगी के कुछ अफ़साने बतलाऊंगा मेरे साथ बैठोगे ? मैं कहा...
इश्कके राग का आलाप कर के"मुरली", तुझे गज़ल सूनाकर दिलमें समा रहा हूं। इश्कके राग का आलाप कर के"मुरली", तुझे गज़ल सूनाकर दिलमें समा रहा हूं।
महफ़िल में झूमकर नाचना, मेरा मिज़ाज बन गया, महफ़िल में झूमकर नाचना, मेरा मिज़ाज बन गया,
जिनके मन बसे गलत चलचित्र जिनके मन बसे गलत चलचित्र
उसने साथी की सच्ची नींव को जाना। समाज की झूठी दीवारों को है गिराता। उसने साथी की सच्ची नींव को जाना। समाज की झूठी दीवारों को है गिराता।