STORYMIRROR

Khalid MOHAMMED

Others

2  

Khalid MOHAMMED

Others

किताब!

किताब!

1 min
248

एक अरसे से ज़िन्दगी यूँ ही गुज़र रही है,

बर्फ की तरह धीरे धीरे पिघल रही है,

समेटना चाहता हूँ जिन यादों को एक किताब में,

बाजार में ऐसी किताब ही नहीं मिल रही है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन