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Khalid MOHAMMED

Others

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Khalid MOHAMMED

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किताब!

किताब!

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एक अरसे से ज़िन्दगी यूँ ही गुज़र रही है,

बर्फ की तरह धीरे धीरे पिघल रही है,

समेटना चाहता हूँ जिन यादों को एक किताब में,

बाजार में ऐसी किताब ही नहीं मिल रही है।


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