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Chandresh Kumar Chhatlani

Romance

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Chandresh Kumar Chhatlani

Romance

हमारी खामोशी

हमारी खामोशी

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"आई लव यू" से,

मैंने लव को तोड़ दिया-

सिर्फ दो खाली शब्दांश छोड़े:

मैं और तुम,

खोखले में कांपते हुए।


अक्षरों को अनंत में क्यों घेरने दिया जाए?

अब, हमारे बीच की जगह

शांति का मंदिर है-

फैला हुआ, अंतहीन।

अपना हाथ बढ़ाओ।

अपनी उंगलियों को मेरी उंगलियों से छूओ-

एक चिंगारी जहाँ भाषा समाप्त हो जाती है।

यहाँ तक कि शून्य भी शरमा जाएगा,

तारा मंडलों में बदल जाएगा।

मैं प्यार को हवा में उकेरने से इनकार करता हूँ,

न ही इसे तुम्हारे गले में जंग लगने देता हूँ।

यह खामोशी, यह अनसुना भजन-

क्या इसी तरह जड़ें धरती से चिपकी नहीं रहतीं?

सितारे खुद को कैसे नाम देते हैं?

प्यार को किसी जबान की ज़रूरत नहीं होती, बस दो परछाइयों की धड़कन

एक रोशनी में विलीन हो जाती है।

तुम: मेरे क्षितिज में जड़ जमाए एक पहाड़।

मैं: तुम्हारे मौन को समेटे आकाश।


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