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Rajiv Jiya Kumar

Romance Fantasy

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Rajiv Jiya Kumar

Romance Fantasy

हम बहकने लगे

हम बहकने लगे

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कदम दर कदम

हम बहकने लगे

सासों में मेरे

तुम महकने लगे,

कदम दर कदम

हम बहकने लगे।।


खामोशी भी

सरगम बजाने लगी

तबीयत मचल

गुनगुनाने लगी,

साया तुम्हारा 

सरसराए आंखों में,

सितारे रंगीन 

राहों में सजने लगे,

कदम दर कदम

हम बहकने लगे।।


तुमसे सजा है

हर लम्हा कतरा कतरा

गर तुम संग न तो

वीरां वीरां है सेहरा,

तुम काला जादू

असर जां पर दिखाते,

तुम मस्त खुशबू 

मदहोश किए जाते,

सनम तुम हो तो मानो

बहार लहराए ऑंखों में

हसीन ख्वाबों में मेरे

तुम बसने लगे,

कदम दर कदम 

हम बहकने लगे। 

       


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