हैरान हूँ मैं।
हैरान हूँ मैं।
हैरान हूँ मैं सच में बहुत ज़्यादा अब,
हैरान नहीं परेशान बहुत ज़्यादा अब।
समझ में नहीं आता कारण सच्ची में,
हैरान-परेशान सचमुच मैं ज़्यादा अब।
जीवनी जीवन की लिखना चाहता हूँ,
जीवनी सच में जो लिखना चाहता हूँ।
आम इंसान कोई नामी-गिरामी तो न,
तो लिखने से थोड़ा सा घबरा रहा हूँ।
थोड़ा संकोच करता तो घबरा रहा हूँ,
थोड़ा डर लगता भी तो घबरा रहा हूँ।
जीवनी सचमुच लिखना चाहता अब,
वास्तविक जीवनी लिखना चाहता हूँ।
अंतरात्मा की बात सुन बड़ा हैरान हूँ,
अंतरात्मा जो कहे सुन वो परेशान हूँ।
सच का दस्तावेज जीवनी में लिखना,
सच कड़वा तो भी लिखना चाहता हूँ।
