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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

हाय हाय सर्दी

हाय हाय सर्दी

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हाय हाय यह सर्दी,

नये साल की मर्जी,

देखो भईया सब लोगों,

नये साल की सर्दी।

मुरझाये पौधे कंपन से,

शीतलहर में ओढ़े कफन से।

हर तरफ हांड मास कप कंपाते,

देश की गरीबी में कहां बच पाते।



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