हाथों की लकीरें
हाथों की लकीरें
उभरती जो
हाथों पर लकीरें
भाग्य बनाती।
एक कलाई
हाथों ने पकड़ी जो
भाई की है वो।
जीवन लड़ी
हाथों में लकीरें ये
कर्म गति है।
इज्जत सदा
हाथों ने तो रखी है
स्व बहनों की।
नया जीवन
हाथों की लकीरों में
परिश्रम है।
बंया करती
हाथों की लकीरें ये
कर्म कैसे है।
बड़े इशारे
हाथों की लकीरों के
लक्ष्य पुकारे।
अलग होती
हाथों की रेखाएं तो
स्वयं की पोथी।
कुछ दुःखी है
हाथों में लकीरें तो
कैसे कहूं मैं।
इसलिए है
हाथ लकीरें दुःखी
हाथ है खाली ।
जीवन सार
हाथों में लकीरें ये
स्व संस्कार है।
पता चलता
हाथों की लकीरों से
कौन कैसे है।
