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सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

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सीमा शर्मा सृजिता

Inspirational

हारे हुये लड़के

हारे हुये लड़के

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आधी जली सिगरेट की तरह 

पैरों से रौंद डालते हैं ये 

अपने बडे़ -बडे़ सपने 

पिता की दिल की बीमारी 

और मां के घुटनों के दर्द के लिए 

दूर शहर नौकरी की इच्छा छोड़ 

पकड़ लेते हैं कोई छोटी -मोटी नौकरी 

ताकि रख सकें मां बाप का ध्यान 


गली के नुक्कड़ पर यारों संग 

हंसी ठिठोली नहीं करते हर शाम 

ये तो लौटते हैं समय से घर 

हाथ में थामे मां -बाबा की दवाई 

और सब्जी भरा थैला 

हर रात सोने से पहले 

ये करते हैं पिता से 

ढेर सारी बातें दबाते हुये पैर 


परेशान होने पर ये नहीं तोड़ते 

मोबाइल और घर का सामान 

ये तो बैठ जाते हैं बच्चों की तरह 

रखकर मां की गोदी में सिर 

बालों में ऊंगलियां फिराती मां 

समझ लेती है पल भर में 

इनके मन की उथल -पुथल 

और देती है समाधान 


उम्र से पहले बडे़ हुये इन लड़कों की 

शुरू ही नहीं हो पाती कभी 

कोई प्रेम कहानी 

नये दौर के इन लड़कों को 

भाती हैं गजल पुरानी 

मां की मुस्कराहट 

और पिता की चमकती आंखों में 

बसती हैं इनकी खुशियां 


दुनिया की नजर में 

हारे हुये ये लड़के 

सिकन्दर होते हैं 

ये बटोर लेते हैं 

अपनी झोली में सच्ची दौलत 

जिस पल इनके सर पर होता है 

इनके ईश्वर का हाथ 

ये दुनिया जीत लेते हैं।


 


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