प्रदीप कुमार दाश "दीपक"
Drama
तेरी छुवन
मन बगर गया
मानो बसंत।
कुक व धूप
दिशाएँ इठलातीं
बसंत रूप।
कलियाँ खिलीं
बसंत को रिझाने
कोंपलें फूटीं।
बसंत रूप
जीवन यौवन में
प्रचण्ड धूप।
बसंती राग
प्रीत के गीत गाते
होली व फाग।
कली चटकी
भौंरे थे मतवाले
महक लुटी।
~ हाइकु : वसं...
बासंती प्रीत
~ बसंती धूप ~
हाइकु : बासंत...
ऋतु वसंत
~ सेदोका वसंत...
ताँका : वसंत
हाइकु : वसंत
बचपन की याद
उनमें गुण था दानशीलता मना कभी उन्होंने किया नहीं उनमें गुण था दानशीलता मना कभी उन्होंने किया नहीं
उसका अंश ही हमें चलाता मन, बुद्धि और ये पंचेन्द्र। उसका अंश ही हमें चलाता मन, बुद्धि और ये पंचेन्द्र।
आज वीराने दिल को बागबान करने निकला हूँ... आज वीराने दिल को बागबान करने निकला हूँ...
वट सावित्री का त्यौहार बड़ी आस्था से इसे मनाते। वट सावित्री का त्यौहार बड़ी आस्था से इसे मनाते।
वो भूल गए थे शायद अपने पेट के अन्नदाता किसान को । वो भूल गए थे शायद अपने पेट के अन्नदाता किसान को ।
परिवार जहाँ दिल की हैं धड़कन, परिवार से ही हैं सुखी संसार। परिवार जहाँ दिल की हैं धड़कन, परिवार से ही हैं सुखी संसार।
इसलिए ख़्वाब बुनने से डरती हूँ ख़्वाब कहीं फिर से ना टूट जाये...? इसलिए ख़्वाब बुनने से डरती हूँ ख़्वाब कहीं फिर से ना टूट जाये...?
ऋषि-मुनियों की, राजा और रानियों की देवी-देवताओं, दैत्य-दानव और अप्सराओं की ऋषि-मुनियों की, राजा और रानियों की देवी-देवताओं, दैत्य-दानव और अप्सराओं की
च्चे रहे सदा खुश उनके उनका आशीर्वाद जानों बदलते ज़माने की कुछ बात तुम भी जानों। च्चे रहे सदा खुश उनके उनका आशीर्वाद जानों बदलते ज़माने की कुछ बात तुम...
पूरब, पश्चिम गमके चन्दन, पश्चिम दक्खिन सुरभित हरदम।। पूरब, पश्चिम गमके चन्दन, पश्चिम दक्खिन सुरभित हरदम।।
दिए जला कर अब ये लिखा है, आपके लिए नज़राना ये पेश। दिए जला कर अब ये लिखा है, आपके लिए नज़राना ये पेश।
कृष्ण के सुदर्शन चक्र में बस्ती शाश्वत पौराणिक कथा। कृष्ण के सुदर्शन चक्र में बस्ती शाश्वत पौराणिक कथा।
किसी ने भावों पर मार दिया कुठारा है।। खेल खेलना सभी को दुनिया में प्यारा है... किसी ने भावों पर मार दिया कुठारा है।। खेल खेलना सभी को दुनिया में प्यारा है....
घर के किसी कोने में गुम है मेरी किताब। घर के किसी कोने में गुम है मेरी किताब।
तुम्हें आते-जाते देख रही हूँ तुम भरपूर कब आओगे ! तुम्हें आते-जाते देख रही हूँ तुम भरपूर कब आओगे !
शायद एक जोकर की कमी रह गई... हाथों में रम्मी का खेल सही था। शायद एक जोकर की कमी रह गई... हाथों में रम्मी का खेल सही था।
आरजू थी तेरे बाहों की पनाहें हो, अब तो नजर फेर ली है तुमने।। आरजू थी तेरे बाहों की पनाहें हो, अब तो नजर फेर ली है तुमने।।
कर के तुझे कटघरे में खड़ा, चल कर लेते हैं आज वक़ालत... कर के तुझे कटघरे में खड़ा, चल कर लेते हैं आज वक़ालत...
स्वाद, रिश्ते, रंग सब रखना है बनाये, सच में होली वो जो कभी न हो ली। स्वाद, रिश्ते, रंग सब रखना है बनाये, सच में होली वो जो कभी न हो ली।
कारगर तरीका है ये आप भी अपना लो भाई। कारगर तरीका है ये आप भी अपना लो भाई।