STORYMIRROR

Keshi Gupta

Tragedy

3  

Keshi Gupta

Tragedy

गुनाह

गुनाह

1 min
226


छलनी कर के रूह उसकी

जिस्म पाया तो क्या पाया

बेगैरत तुझे कैसे ना

खुदा का भी खौफ आया


हवस के जुनून में 

कुचल डाली एक जिंदगी 

नहीं सोचा गुनाह तेरा 

कभी पीछा ना छोड़ेगा


 इंसान की खाल में

 बन के दरिंदे घूम रहे यहां

 कर दो संहार इनका

 कह रही यह दुर्गा मां!












विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy