Shailaja Bhattad
Abstract
सब तरफ से ईंटें उठती रही
हम थे कि अनजान ही बने रहे।
अब फूलों से रास्ते सजते हैं
कभी-कभी तो गुलदस्ते भी मिलते हैं।
सबकी होली
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
राम- भरत
श्री राम- भरत
हिन्दी नारे
श्रीराम
आँखमिचौली, चोर-सिपाही, हम करते थे, हर खेल चयन । क्या मजे थे गिल्ली-डंडे में, मुट्ठी में कैद संपूर... आँखमिचौली, चोर-सिपाही, हम करते थे, हर खेल चयन । क्या मजे थे गिल्ली-डंडे में, ...
ऐसा भी कभी होता है ...... घोर -घोर बवंड़र चलते , उथल मचने दुनिया में , मैं गहराई में छिप जाती हूँ ... ऐसा भी कभी होता है ...... घोर -घोर बवंड़र चलते , उथल मचने दुनिया में , मैं गहर...
आओ मिलकर खाते हैं, कच्ची पक्की रोटियां। आओ मिलकर खाते हैं, कच्ची पक्की रोटियां।
मेरी चादर कुछ मैली है थोडा सा सह लोगे क्या ? अभी भोर में बहुत देर है अपनाकर रह लोगे क्या ? मेरी चादर कुछ मैली है थोडा सा सह लोगे क्या ? अभी भोर में बहुत देर है अपनाकर र...
भव्य भगवद्गीता देता है ब्रह्मज्ञान का यही श्लोक। भव्य भगवद्गीता देता है ब्रह्मज्ञान का यही श्लोक।
एक नयी रौशनी लिख दो अपनी आने वाली नस्लों के नाम। एक नयी रौशनी लिख दो अपनी आने वाली नस्लों के नाम।
मौन रहकर भी सदा तुम बोलते अधिकार से हो, बंद हो तुम सीप जैसे तुम खुले अखबार से हो । मौन रहकर भी सदा तुम बोलते अधिकार से हो, बंद हो तुम सीप जैसे तुम खुले अखबार से...
क्या कभी-कभार कोई अंधेरा उसी समय रोशनी भी होता है ? क्या कभी-कभार कोई अंधेरा उसी समय रोशनी भी होता है ?
जिसकी कोख में सृजन हुआ वही हैं भाग्य विधाता। जिसकी कोख में सृजन हुआ वही हैं भाग्य विधाता।
दिल की है भावनाएं बहुत प्यारी लगती हैं। दिल की है भावनाएं बहुत प्यारी लगती हैं।
मुझे महज एक वस्तु मत समझना व्यंग बाणों का घातक प्रहार भी सहती हूँ। खिलौना नही हूँ मैं! मुझे महज एक वस्तु मत समझना व्यंग बाणों का घातक प्रहार भी सहती हूँ। खिलौना नह...
जिसे ज़िंदगी की न कोई क़दर है ज़माने को ख़ुद से ख़फ़ा देखता है। जिसे ज़िंदगी की न कोई क़दर है ज़माने को ख़ुद से ख़फ़ा देखता है।
तुम जब तक उसे पहचानोगे, वह बदल जाएगी। तुम जब तक उसे पहचानोगे, वह बदल जाएगी।
बढ़ा दो अपने हाथों को, अब दुल्हन बनाने की बारी आई है... बढ़ा दो अपने हाथों को, अब दुल्हन बनाने की बारी आई है...
तप रहे किरणों से सूरज की फिर भी निश्चल मुस्करा रहे गाथा अटूट प्रेम की अपनी बता रहे फूल सूरजमुखी ... तप रहे किरणों से सूरज की फिर भी निश्चल मुस्करा रहे गाथा अटूट प्रेम की अपनी ब...
आँखों में रख लो ऐसी मूरत सजाकर। आँखों में रख लो ऐसी मूरत सजाकर।
खुशबू का मालिक मैं, हूँ सबका प्यारा; धूल के टुकड़े तुझ पर, कोई न तेरा सहारा... खुशबू का मालिक मैं, हूँ सबका प्यारा; धूल के टुकड़े तुझ पर, कोई न तेरा सहारा...
क्या जिंदगी में ऐसा नहीं ? जीने ,कुछ करने की , कभी न खत्म होने वाली जिजीविषा पर फिर बंध जाते हैं... क्या जिंदगी में ऐसा नहीं ? जीने ,कुछ करने की , कभी न खत्म होने वाली जिजीविषा ...
धीमी तपती आंच सा है माँ प्यार तुम्हारा शीत में गर्मी का एहसास है माँ प्यार तुम्हारा..। धीमी तपती आंच सा है माँ प्यार तुम्हारा शीत में गर्मी का एहसास है माँ प्...
नीलम नीलवर्ण से बादल, प्रेयसी के हलकारे बादल। नीलम नीलवर्ण से बादल, प्रेयसी के हलकारे बादल।