STORYMIRROR

Gulafshan Neyaz

Action Classics Crime

4  

Gulafshan Neyaz

Action Classics Crime

गुलाब और कांटा

गुलाब और कांटा

1 min
254

मैंने पूछा गुलाब से इतनी सुन्दर हो तुम

फिर ये कांटे लिए क्यों खड़ी हो तुम


गुलाब ने हंस कर ये पगली नादान हो तुम

इस दुनिया से अनजान हो तुम


 यंहा कांटे नहीं रखवाले है

जंगली से मुझे बचाते है

 

सुनकर गुलाब की बात सन्न होइ

दिल ही दिल बेचैन होइ


पढ़ा था खबर जो रेप का

देखा था जो चेहरा बच्ची का


बिल्कुल थी गुलाब की तरह

नाजुक और प्यारी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Action