STORYMIRROR

Gulafshan Neyaz

Others

3  

Gulafshan Neyaz

Others

गाँव मे बसंत है

गाँव मे बसंत है

1 min
215

बसंत की हवाओं ने

गाँव की याद दिलाई है


मुझ वैरागी को

घर की याद आई है


शहर मे कहाँ बसंत है

ना सरसों के फूल है


हवाओं मे उमंग नहीं

दिल मे कोई तरंग नहीं


धरती का सिंगार नहीं

बिल्डिंग का अम्बार है


गाँव में बसंत है

खेत है प्यार है


अपनों का साथ है

चिड़ियाँ का चहचहाहट है


बाग़ हैं बगीचे हैं

गाँव में बसंत है।


Rate this content
Log in