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Gulafshan Neyaz

Others

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Gulafshan Neyaz

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गाँव मे बसंत है

गाँव मे बसंत है

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बसंत की हवाओं ने

गाँव की याद दिलाई है


मुझ वैरागी को

घर की याद आई है


शहर मे कहाँ बसंत है

ना सरसों के फूल है


हवाओं मे उमंग नहीं

दिल मे कोई तरंग नहीं


धरती का सिंगार नहीं

बिल्डिंग का अम्बार है


गाँव में बसंत है

खेत है प्यार है


अपनों का साथ है

चिड़ियाँ का चहचहाहट है


बाग़ हैं बगीचे हैं

गाँव में बसंत है।


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