गर्मी से परेशान
गर्मी से परेशान
तपती घरती
तपता आसमान
उसमे आग बरसाये सूरज भाईसाहब
पसीने से लोग बेहाल
धूप से बचन को
ढूंढते है छाव
लोग परेशान
गर्मी से बेहाल
दोपहर को जाये कहां, ये परेशान
सहारा उनको पंखे, कूलर का
रात को कहीं चली न जाये बिजली
ये चिंता इनको अपार
जैसे तैसे हर साल गुजारे
ये बेचारे इंसान
फिर भी पारा चढता जाये हर साल।
