गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी
गणेश चतुर्थी का शुभ पावन दिन, जब जब आवै।
शुभ और लाभ दोनों सब के भाग्य, तब तब लावै।
मंगलमूर्ति गजानन सुखकर्ता विघ्नहर्ता गणनाथ।
संसार में उसका नाम हो, तुम रहो जिसके साथ।
शिव और पार्वती के लाल जो, गणपति कहलाय।
सच्चे मन से जो पूजा करे, भक्त वही विवेक पाय।
आज्ञा पालन हेतु माता की, दीन्हा शीश ही कटाय।
वचन दिया मात को, टूटा नहीं चाहे कछु हो जाय।
लड्डू जिन कोे प्रिय लगे, आप हो गणपति एकदंत।
सभी पर हो आपकी कृपा, आपकी कथा है अनंत।
संसार में युगों से आप की ही, सर्वप्रथम पूजा होय।
लेकर आप का ही नाम शुरू, काज करे सब कोय।
चरणों में माता और पिता के, बसते हैं चारों धाम।
संसार को आपने यह ज्ञान दिया, बारम्बार प्रणाम।
विघ्नहर्ता आप पर ही है, हम भक्तों को विश्वास।
बड़ी कृपा हो, जिसको मिले शुभ चरणों में वास।
गणपति बप्पा मोरया, यह गूंजे आकाश में आज।
मूषक पर आये बैठ कर, मंगल करने सारे काज।
वक्रतुण्ड महाकाय को, अपने भक्तों से प्यार है।
मन से जिसने पूजा, समझो उसका बेड़ा पार है।
कर दो हमारे जीवन से, दुख दर्दो का नाश आज।
चिंताहरण कर दो कृपा, पूर्ण कर दो हमारे काज।
गणपति का रूप निराला है, मुख भोला भाला है।
जब आया भक्त पे संकट, उसे आपने संभाला है।
भगवान गणपति जी आप को प्रसन्नता सम्पूर्ण दें।
जो भक्ति इनकी करे, उसे सुख एवं संपत्ति पूर्ण दें।
जब भी गणपति आते हैं, सुख प्रसन्नता ले आते हैं।
जब घर से जाते हैं, उन्नति का आशीर्वाद दे जातेे हैं।
आशाओं के पुष्प खिलें, कभी न हो संकट से सामना।
सब प्रसन्न रहें, सबको गणेश चतुर्थी की शुभकामना।
