अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina
Horror Romance Tragedy
मध्य हमारे कोई न हो
बीच इशारे कोई न हो..
दौड़े आना नज़दीक रे
साथ-सहारे कोई न हो..
रह पकड़े हाथों को मिरे
भाव किनारे कोई न हो..
बंदिश तोड़े आना चले
थाम सँवारे कोई न हो..
आवाज़ मुझे देना सखे
बोल-पुकारे कोई न हो..।
बसंत ऋतु
देश भक्ति गीत
आंखों में बसे...
बिजली सी गिर ...
बहुरूपिया
माँ - मुक्तक
गीत अधूरा
डगर
मैं हिन्दी हू...
हिन्दी पर हाइ...
अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इंतजार करते अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इ...
तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ। तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ।
नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।। नियत चक्रधारी ने मार हार विजय निर्णायक कर्म धर्म मर्म का मान किया।।
कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।। कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।।
अरे बाप रे, आयी मुसीबत कह कर, वो चिल्लाया। अरे बाप रे, आयी मुसीबत कह कर, वो चिल्लाया।
कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से। कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से।
आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है। आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है।
नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," चिकन मसाल नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," ...
कुशल बहु तेरे माँ -बाप भी न लगाएँगे हॉस्पीटलों के फेरे। कुशल बहु तेरे माँ -बाप भी न लगाएँगे हॉस्पीटलों के फेरे।
कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl
लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है। लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है।
कृपा निधान कृपा करो हम सब पर, प्रभु अब तो लगता है बहुत हमें डर। कृपा निधान कृपा करो हम सब पर, प्रभु अब तो लगता है बहुत हमें डर।
जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद। जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद।
हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ? हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ?
उसने एक बच्चे को बहलाया-फुसलाया, और एकांत कमरे में जाकर मारकर खाया। उसने एक बच्चे को बहलाया-फुसलाया, और एकांत कमरे में जाकर मारकर खाया।
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में नहाना दो वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में...
विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है। विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है।
बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं। बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं।
जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं। जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं।