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Bhoop Singh Bharti

Romance

4  

Bhoop Singh Bharti

Romance

"गजल"

"गजल"

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मैं तो तेरी प्राण प्यारी, मैं दिल को तुम पर हारी।

तेरी बातों में आकर, फिरती मैं मारी मारी।।


समझ ना मुझे पराया, ये दिल तो तुझ पर आया।

ये दिल दिनभर तड़फता, रात भी होती खुंवारी।


झूमकर आया सावन, सूना सा लगता जीवन।

सम्भालो आकर साजन, प्रेम की जली चिंगारी।।


तेरे चरणों की दासी, मैं हूँ दर्शन की प्यासी।

मेरी अंखियों में तू है, सदा ये सूरत निहारी।।


प्रेम मैं तुम से करती, तुम्हीं पर जीती मरती।

नाम ये तेरे लिखदी, जिंदगी अपनी सारी।।


पकड़ी है तेरी बैया, मानकर अपना सैया।

संग संग चलना मेरे, करूंगी सेवा थारी।।


तुम्हारी सूरत भाये, ओर कुछ नहीं सुहाये।

चलूंगी संग में तेरे, तुम्हीं पर मैं बलिहारी।।


        


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