गजल
गजल
अगर तुम प्यार करते हो तो हिम्मत क्यों नहीं करते।
अगर पाने की कोशिश है बगावत क्यों नहीं करते।
फरिश्ते की सिफत में मान बैठे हो भला क्यों कर।
अगर मुझसे शिकायत है शिकायत क्यों नहीं करते।
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मेरे हमदम मेरे दिलबर मेरे हमराज हो तुम।
मेरे दिल को जो भाता है वही आवाज हो तुम।
दिलों के तार जुड़ते हैं नए झंकार करते हैं।
तुम्ही मौसीकी मेरी हो ,गीतों की साज हो तुम।
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दिलों को तोड़ जाए वह कभी आवाज मत होना।
जिसे कोई ना समझे तुम कभी वो राज मत होना।
तुम्हारे दिल में जो आए ज़ुबां से उसको कह देना।
कभी तुम मन ही मन मुझसे सनम नाराज मत होना।:
मोहब्बत अपना पाकीजा इसे बदनाम ना करना।
जुबां से कह ना पाए वह कभी अल्फाज मत होना।

