गजल सपन सी
गजल सपन सी
सपनों की दुनिया में खोना सबको अच्छा लगता है।
जब जब स्वप्न टूटते हैं तो मन को धक्का लगता है।
रहे घूमते साथ चांद के ,बादल नदिया सुंदर- झरने
पर दिन में सपनों को सीना कितना दुस्तर लगता है
चारों तरफ बहारें थी प्रिय तुम थीं झरने सुंदर थे।
आंख खुली तो जाना क्यों वक्त ये बदतर लगता है।
दिल खोज रहा जन्मों से प्यारी सी जिस चाहत को।
वो सपनों में मिल जाए तो कितना अच्छा लगता है।
जो चले गए उस पार कभी वापस लौट न आने को।
सपनों में उसके संग जीना कितना सुंदर लगता है।
जागी आंखों में सपनों के धागे बुनना कितना दुस्तर
सांसों की सरगम पर गाना कितना मुश्किल लगता है।

