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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

Fantasy Others

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अनामिका वैश्य आईना Anamika Vaish Aina

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ग़ज़ल पहर आखिरी

ग़ज़ल पहर आखिरी

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यूँ पनाहों में बीते पहर आख़िरी 

दे मुझे तू अब तो ज़हर आख़िरी


सितम सारे हार जाएंगे सखे 

जिंदगी का ये है कहर आख़िरी


थाम बैठे हैं स्वयं को हम अभी 

तू सखे है मेरी ठहर आख़िरी


सौंपना खुद को मुझे उस देव को 

डूबने वाली तुम लहर आख़िरी


गा न पाऊँगी बिन तिरे साथिया

गीत-गज़लों की तू बहर आख़िरी


आशियां मेरा तिरा दिल ही रहे 

तू बनेगा मेरा शहर आख़िरी.. 



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