गज़ल के अल्फाज़
गज़ल के अल्फाज़
कोई मुझे एसी महबूबा मिले,
उसका चेहरा देखकर मुझे सुकून मिले,
उसकी मधुर आवाज सुनकर मुझको,
मेरी कलम के लिये इश्क के अल्फाज़ मिले।
उसके दिल के साथ मेरा दिल मिले,
उसके दिल की धड़कन मुझको सुनने मिले,
उसकी धड़कन के साथ लय मिलाकर मुझको,
उसके अल्फाज़ से गज़ल लिखने को मिले।
उसके सांसो की सरगम का साथ मिले,
उसकी सरगम साथ इश्क का स्वर मिले,
इश्क के नशीले स्वर उसमें लगाकर मुझको,
मेरी गज़ल को इश्क का मधुर संगीत मिले।
उसके दिल में रहने की थोड़ी सी जगह मिले,
उसके नैनों में मेरी तस्वीर देखने को मिले,
उसके बेशुमार हुस्न में मदहोश बनकर "मुरली",
उसके इश्क की गज़ल गाने की तक मिले।

