गजल दिल जला
गजल दिल जला
दो दिल के दरमियान सदा फासला मिले
देखो जिसे भी यार वही दिल जला मिले।
इनकी उड़ाने बंद के तबाही का है समां
इन उड़ते पंछियों को जैसे के पर छिला मिले।
अब प्यार की समां वो जलाता क्यों नहीं
लुटा हो ज़िन्दगी भर का काफिला मिले।
एक दर्द भरा ये गीत वो रोशनी का दायरा
रूबरू जो आये चाँद नीतू को उजला मिले।
गिरह
कोई अगर मिटा सके उल्फ़त के फासले
मुझको मेरी वफ़ाओं का कुछ तो सिला मिले।

