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Sudershan kumar sharma

Romance

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Sudershan kumar sharma

Romance

गजल(बंदिशें)

गजल(बंदिशें)

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जिद्द रहती है हर पल आपके पास आने की, 

डर जाता हूँ देख कर बंदिशें जमाने की।


मुद्दतों से प्यासे हैं, उनको पाने के लिए, 

एक वो हैं जिनको समय नहीं हमको आजमाने के लिए। 


 देख कर गमगीन हमें चोट लगा देते हैं वो अक्सर,

हमें भी आदत बन चुकी है अब चोट खाने की। 


मत जाया करो इन अनमोल अश्कों को हर पल,

जरा बता दो क्या कीमत दूँ तेरे मुस्कराने की। 


गिले शिकवे भी सुदर्शन कोई करे किससे,

जब अपनों को ही हो आदत अपनों को आजमाने की। 


रख यकीन बेझिझक होकर तू सदा, हमें तो आदत है,

हर बात तुझे बताने की। 


नहीं रूकता वक्त किसी के रोकने से सुदर्शन,

हँस खेल के गुजार ले बचे वक्त को क्या जरूरत है रूठने व मनाने की। 



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