STORYMIRROR

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

4  

aazam nayyar

Abstract Fantasy Children

गीत

गीत

1 min
405

दे सकूं गीत ग़ज़ल वो किताबों में मिले 

कब सकूं दोस्त मगर इन शराबों में मिले


ढूँढ़ मत प्यार कि लोगों कि न सांसो में बू 

यारों ख़ुशबू हमेशा ही इन गुलाबों में मिले


देख वो बात नहीं तस्वीर में उसकी तो 

ख़ूबसूरती देखले तू ही हिजाबों में मिले


किस तरह मैं यकीं उसपे करुं कैसे अब तो 

प्यार की ही न झलक यार ज़वाबों में मिले


इसलिए चैन नहीं दिल को मिला है मेरे 

उसकी तस्वीर न ही यार क़िताबों में मिले 


वो कभी आया न मिलनें को हक़ीक़त में ही 

वो आकर ख़ूब मुझे ए "आज़म" ख़्वाबों में मिले।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract