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जगन्नाथ "पृथक"

Classics Inspirational Others

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जगन्नाथ "पृथक"

Classics Inspirational Others

गीत/मेरे वतन

गीत/मेरे वतन

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शान जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन,
आन जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन,
मेरे वतन... मेरे वतन...

है मोहब्बत तेरी जिस्म के,
हर कतरे में, मेरे वतन,
आंख तेरी तरफ जो उठे,
हो सर कलम, मेरा वचन,
प्यारे वतन, मेरे वतन,
शान जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन,
आन जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन..।।

गम नहीं सर भी कट जाये,
तेरे लिए, मेरे वतन,
दिल में है बस यही आरजू,
हो तिरंगा, मेरा कफन,
प्यारे वतन, मेरे वतन,
शान जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन,
आन जाने न देंगे कभी,
मेरे वतन, प्यारे वतन, मेरे वतन..।।

गीत--: जगन्नाथ "पृथक"
     9926423930


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