क्योंकि पानी कम है/जगन्नाथ "पृथक"
क्योंकि पानी कम है/जगन्नाथ "पृथक"
बूँद-बूँद हमे पानी बचाना,
सबको बात बताना।
क्योंकि पानी कम है, ना व्यर्थ बहाना।
मेरा बचन निभाना...
मेरा बचन निभाना...।।
गागर का सूखा है पानी,
रूठ चुका पानी सागर का,
नल-कूपों में पानी अतिथि,
कुओं का रीता-रीता पानी,
सबको बात बताना।
क्योंकि पानी कम है, ना व्यर्थ बहाना।
मेरा बचन निभाना...
मेरा बचन निभाना...।।
धरती में गहरा है पानी,
अम्बर भी पानी का प्यासा,
पानी-पानी युद्ध छिड़ा है,
चारों तरफ आशा है पानी,
सबको बात बताना।
क्योंकि पानी कम है, ना व्यर्थ बहाना।
मेरा बचन निभाना...
मेरा बचन निभाना...।।
जीवन का गहना है पानी,
पानी बिना सब सूना-सूना,
पानी मंदिर, पानी मस्जिद,
गिरजाघर, गुरुदुवारा पानी,
सबको बात बताना।
क्योंकि पानी कम है ना व्यर्थ बहाना।
मेरा बचन निभाना...
मेरा बचन निभाना...।।
