कविता/एक दिन
कविता/एक दिन
एक दिन, सब कुछ,
छोड़कर चला जायेगा।
छोड़कर चला जायेगा,
सब कुछ, एक दिन।
किस बात का अभिमान है?
किस बात से नादान है?
क्या तेरी यही पहचान है?
सब जानकर क्यों अनजान है।
एक दिन!
एक दिन!
यहीं धरती, यहीं आसमाँ,
यहीं दिन, यहीं रात,
यहीं कल, यहीं आज,
ये मौसम, ये बहार,
हवा, पानी, सर्दी, गर्मी,
ये घर, ये मंदिर,
यहीं धरम, यहीं करम,
ये वक्त, ये वचन!
एक दिन, छोड़कर चला जायेगा,
सब कुछ, एक दिन।
एक दिन!
यहीं माँ, यहीं बाप,
यहीं भाई, यहीं बहन,
यहीं बीवी, यहीं बच्चे,
ये रिश्ते, ये नाते,
दिल, धड़कन, तन, मन,
ये धन, ये दौलत,
यहीं अच्छा, यहीं बुरा,
ये दोस्त, ये दुश्मन!
एक दिन, छोड़कर चला जायेगा,
सब कुछ, एक दिन।
रचना-: "जगन्नाथ पृथक"
