STORYMIRROR

besty besty

Tragedy

3  

besty besty

Tragedy

घुटन

घुटन

1 min
148

धीरे धीरे मेरे दिल में घुटन बढ़ रही है 

में नही जानती मेरी ज़िंदगी किस राह पे चल रही है 


थोड़ा सकून पाऊं तो सोचूं बैठकर

आखिर ये सांसे चल क्यू रही है 


मेरे इश्क को ठुकरा दिया उसने 

उसको पाने को मेरी रूह तड़प रही है। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy