ग़ज़ल
ग़ज़ल
उसे अपना दिलबर, बनाना है यारो
सफ़र संग उसके बिताना है यारो।
मुहब्बत में उसकी मैं कितना तड़पता,
तड़प मेरी उसको बताना है यारो।
बनाई है मैंने जो तस्वीर उसकी,
मिले वह तो उसको दिखाना है यारो।
मुहब्बत के सागर की गहराई क्या है ?
मुझे डूब कर पार जाना है यारो।
न हो कोई ख़्वाहिश न हो कोई अरमाँ
उसे बस गले अब लगाना है यारो।
बसा है जो दिल में वो साथी बने अब,
हरिक तीर को आज़माना है यारो।
वफ़ा के वो बदलें करें बेवफाई
मुझे तो वफ़ा बस निभाना है यारो।
जमाने से मुझको गिला तो नहीं है
क्यूँ पीछे पड़ा फिर जमाना है यारो।
दुखाया सभी ने मेरा दिल हमेशा
मुझे फिर भी मंज़िल पे जाना है यारो।
सही वक़्त पर मैं सुनाऊंगा उसको
लिखा कागजो पर फ़साना है यारो।
यहां मयकदे में हैं जितने शराबी
उन्हें जामे-उल्फ़त पिलाना है यारो।
मिरे सारे अरमाँ तो अब मर चुके हैं
ज़माने को बस अब हँसाना है यारो।
