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mamta pathak

Tragedy

4  

mamta pathak

Tragedy

फ़साना-गो

फ़साना-गो

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ज़िन्दगी की जद्दोजहद को,आँखों में लिए चलते हैं,

फ़साना-गो है हम, किरदार लिए फिरते है।


कहो कौन - सा फ़साना,सुनाऊँ तुमको,

रंजो -गम या मोहब्बते यार बताऊँ तुमको,


तुम्हारी रज़ा के हर, अल्फ़ाज़ लिए फिरते है,

फ़साना- गो है हम, किरदार लिए फिरते हैं।


नहीं कोई फ़साना,हम यूँ ही सुनाते हैं यारों,

तज़ुर्बा-ए- ज़िन्दगी का आईना, हम दिखाते हैं यारों,


ज़हन में हज़ारों रंग के, ज़ज्बात लिए फिरते हैं,

फ़साना- गो है हम,  किरदार लिए फिरते हैं।


बन जाना फ़साना-गो, बड़ा आसान नहीं होता है,

जज़्बाती दिल लिए,हर अल्फाज जीना होता है,


खुशियों का सौदा कर, हम झूठी मुस्कान लिए फिरते हैं,

फ़साना- गो है हम, किरदार लिए फिरते हैं।


ज़िन्दगी की जद्दोजहद को,आँखों में लिए चलते हैं,

फ़साना-गो है हम, किरदार लिए फिरते है।


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