फ़साना-गो
फ़साना-गो
ज़िन्दगी की जद्दोजहद को,आँखों में लिए चलते हैं,
फ़साना-गो है हम, किरदार लिए फिरते है।
कहो कौन - सा फ़साना,सुनाऊँ तुमको,
रंजो -गम या मोहब्बते यार बताऊँ तुमको,
तुम्हारी रज़ा के हर, अल्फ़ाज़ लिए फिरते है,
फ़साना- गो है हम, किरदार लिए फिरते हैं।
नहीं कोई फ़साना,हम यूँ ही सुनाते हैं यारों,
तज़ुर्बा-ए- ज़िन्दगी का आईना, हम दिखाते हैं यारों,
ज़हन में हज़ारों रंग के, ज़ज्बात लिए फिरते हैं,
फ़साना- गो है हम, किरदार लिए फिरते हैं।
बन जाना फ़साना-गो, बड़ा आसान नहीं होता है,
जज़्बाती दिल लिए,हर अल्फाज जीना होता है,
खुशियों का सौदा कर, हम झूठी मुस्कान लिए फिरते हैं,
फ़साना- गो है हम, किरदार लिए फिरते हैं।
ज़िन्दगी की जद्दोजहद को,आँखों में लिए चलते हैं,
फ़साना-गो है हम, किरदार लिए फिरते है।
