कलम और प्रेम
कलम और प्रेम
1 min
251
मैं लिखती हूँ जितना
टूटे मन की कविताएं
उतना ही लिखती हूँ
प्रेम को भी
मैं प्रेम के प्रेम को
और प्रेम की पीड़ा को
दोनों को महसूस करती हूँ
लेकिन मुझे, प्रेम के प्रेम से कहीं ज्यादा
प्रेम की पीड़ा का प्रेम गहरा लगता है
इसलिए कलम चुनती है गहरे प्रेम को!
