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Padma Motwani

Tragedy

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Padma Motwani

Tragedy

#freeindia

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आज़ाद होते हुए भी जो पिंजरे में बंद हैं

पंख होते हुए भी खुले में उड़ नहीं सकती।

घर से निकलने पर बंधी हैं कुछ संस्कारों से

अपने अभिमान की बात कर नहीं सकती

आज़ाद भारत की महान नारी है कहलाती!


समाज की हर रीति रस्म बड़े मान से निभाती

अपनी ज़रा सी सुविधा के लिए लताड़ी जाती।

रिश्ते नातों में वह एक कमाऊ औरत कहलाती

अपनी इच्छा से कहीं भी खर्च नहीं कर पाती

आज़ाद भारत की महान नारी है कहलाती!


बड़ी फितरत से आंसुओं को वह छिपाए फिरती

खुशी खुशी अपने अरमान कुर्बान किया करती।

अपनों के आनंद में कुछ हिस्से की उम्मीद करती

मिलने न मिलने पर स्वयं पर न्योछावर वह होती

आज़ाद भारत की महान नारी है कहलाती!



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