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Devendraa Kumar mishra

Romance

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Devendraa Kumar mishra

Romance

एकाकार हो जाएं

एकाकार हो जाएं

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जिसने न किया हो प्रेम 

उसे भी हो जाय 

ये मास है मिलन का 

मधुर मधुर मद्धम मद्धम 

आओ एकाकार हो जाएं 


शिव भी आज नाचे हैं 

पार्वती भी आज संवरी हैं 

देव भी, महादेव भी 

शिव शक्ति का मिलन भी 

मदनोत्सव में मग्न हैं 


हम तो साधारण मानुष 

सब छोड़ दुनियां की झंझट 

आओ एकाकार हो जाएं 

आओ ऐसे डूबे प्रेम में कि

मुक्ति का अह्सास हो जाए 


व्यर्थ लगने लगे स्वर्ग के वैभव 

फीके पड़ने लगे मोक्ष के रास्ते 

आओ कि हम बने हैं जिसके लिए 

उस उत्सव में शामिल हो 

प्रेम का बीज़ बो जाएं 

मधुर बेला है, अनुपम घड़ी है 

आज प्रेम की अग्नि ही बड़ी है 


आओ कि दो न रहें आज, एक हो जाएं 

सागर में मिलती हैं जैसे नदियां 

मेरा प्रेम बेचैन है तुममे समाने को 

आओ सृजन करे, नई सृष्टि रचें।


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