एक कोशिश
एक कोशिश
कोशिश है कि मैं कुछ बन पाऊँ ,
और तुम्हारे लिए कुछ कर पाऊँ।।
जब आए मौसम गर्मी का,
तब तुम्हारे चेहरे से छूकर गुजरने वाली,
वो ठंडी हवाएं बन पाऊँ।।
कोशिश है...
एक ललक जगी है सीने में,
कि तुम को वो सब दें पाऊँ
दरिया तो मैं बन सकती नहीं,
लेकिन चाहत है कि जब कभी,
तुम डुबने लगो तब किनारा तो मैं बन पाऊँ।।
कोशिश है...
जब जीवन ये संघर्ष करें,
तब कदम मिलाकर चल पाऊँ ,
तुम्हारे लिए सर्दी की चादर नहीं,
तो कम से कम हल्की सी धूप तो मैं बन पाऊँ ।।
कोशिश है कि...
गूंजता हुआ स्वर हो तुम,
तुम्हारी लय से लय मिला पाऊँ ,
दर्द तो मैं ले सकती नहीं,
पर घावों पर तुम्हारे मरहम तो मैं कर पाऊँ।।
श
कोशिश है कि मैं कुछ बन पाऊँ और तुम्हारे लिए कुछ कर पाऊँ।।
