STORYMIRROR

SHREYA PANDEY .

Romance

4  

SHREYA PANDEY .

Romance

एक कल्पना तेरी

एक कल्पना तेरी

1 min
353

सांझ में डूबता हुए सूरज

जब छाप छोड़ अपना नभ पर

प्रकाशित हो उठता है अम्बर

उस श्वेत बादल पर बुनती हूं

एक कल्पना तेरी


आम के पेड़ की डाली पर बैठी

एक कोकिला मधुर बेला में

पुकारे अपने खोए साथी को

कहा छिपे हो अकेला हूं मैं

उस डाली पर उभरती है

एक कल्पना तेरी


नहरों की लहरों पर अटकी

एक चींटी बेगानी सी

देख एक टुकड़ा तिनके का

हो उठे अजब दीवानी सी

उस तिनके पर बुनती हूं 

एक कल्पना तेरी


शरद की ठंडी पुरवाई

जमादे जो पूरी गुफा को

सिकुड़ कर बैठे एक दूजे को गले लगाए

दो मृग छिपाए एक दूजे में अपनी वफा को

उस पुरवाई में उभरती है

एक कल्पना तेरी


बारिश की बूंदे जो बैठे सिमटकर

बादल के दिल और जान में

मिले धारा से बिछड़े मेघा

ओस बने मेघा के अश्रु 

उसी धरा के निकट पर

ओस से सने पात पर उभारुं

एक कल्पना तेरी।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance