एक हसीना थी, मेरे सपनो की
एक हसीना थी, मेरे सपनो की
एक हसीना थी, मेरे सपनो की।
दिल दे बैठा अपना उसको।
चाहत थी उससे और प्यार था।
दोनों साथ में रहने का इंतजार था।
फिर क्या हुआ अनजान थी वो।
लेकिन मेरी जान थी वो।
कभी मुस्काती कभी हंस लेती।
आती आधी रातों में वो, यूं ही मुझे जगा देती।
कभी जो उठ जाते नींद टूटने पर।
उसके ही ख्वाबों में रहता।
कभी वो दिन में भी आती परछाई बनकर।
मै उसके ही परछाई में डूबा रहता।
बस उसी के इंतजार में रहता हूं, फिर से चेहरा दिखाए।
आए मेरे दिल में फूलों की तरह खिलकर।
मै उसे रोज देखूं सपने में, तन्हा होकर।
जब वो अपना आशिक बना ले, लव यू कहकर।
रूठे न उनसे हम गहरी नींद में।
ओझल न हो एक पल वो मुझसे।
बरकरार रहे मेरी पहली मोहब्बत, सपनो की।
जो ख्वाब मै देखता हूं उसके।
एक बार फिर से लौट कर वो आए, मैं उसे खूब प्यार दूंगा।
हो सके तो मै उसको, दिल की शय्या पर बैठाउंगा।
मै ऐसे ही ख्वाबों में डूबा रहता हूं यारो।
वो तो बार- बार नींदों में आती है, अब तो उसे कैसे भूल जाऊंगा।

