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Minal Aggarwal

Tragedy

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Minal Aggarwal

Tragedy

एक एक करके

एक एक करके

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एक एक करके 

सब बिछड़ते जा रहे हैं 

एक एक करके 

सब दूर जा रहे हैं 

आंखों से ओझल होते जा रहे हैं 

जख्म पर जख्म दिल को 

दिये जा रहे हैं 

जैसे इस दुनिया में आये थे 

खुशियों की बहारें लेकर 

वैसे ही तुम्हें ठहरना था 

अभी तो कुछ और 

हजार पर 

आंखों में यूं धूल झोंककर 

हाथ छुड़ाकर जो सब जा रहे हैं 

कुछ अच्छा प्रतीत नहीं हो रहा 

मनुष्य इतना तुच्छ प्राणी है कि 

उसका जोर किसी पर चलता ही नहीं 

कोई ऐसा तरीका भी नहीं कि 

बुझते दीये में तेल डाल 

उसे जब तक चाहे जला ले 

इतनी तेजी से बदल रहे मंजर कि

अब तो अपने प्रियजनों के बिना ही 

जीने की आदत डाल लें

इस मृत्युलोक में 

पीछे मुड़कर देखे ही नहीं 

जो खो रहे हैं 

उसे पाने की चेष्टा करें ही नहीं 

जो साथ है और 

साथ देता है 

उसे ही साथ लेकर 

चलने की कोशिश करें 

यह अनुमान लगाना भी 

अब तो कठिन है कि 

इस काफिले में से 

किसका हाथ 

अगले ही पल छूटने वाला है 

किसी का कोई भरोसा नहीं कि

कब किस मोड़ पर 

किसी का भी मौत का बुलावा 

आने वाला है।


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