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Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

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Dr Baman Chandra Dixit

Tragedy

एक दुआ

एक दुआ

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ये रास्ता क्यों धुआं धुआं

ये किस जगह है किस गली

हर शख्स क्यों परेशान यहां

हर दिल में क्यों है खलबली।।


कहां खो गया चैनो अमन

जो जर्रे जर्रे में बसता था

वो अपनापन वो खैर खबर

जो निहारने को तरसता था

उन्हीं आँखों मे ये गैर अन्दाज़

कब कैसे क्यों पैर पसार ली?

ये रास्ता क्यों धुआं धुआं.....


कल थे वो आसपास मेरे

आज दुश्मन कैसे हो गये 

सदियों की जो दोस्ती-यारी

जात पात में कैसे खो गये 

सोचूं कैसे वो बदल से गये

और कैसे यूँ मुहँ फ़ेर ली।

ये रास्ता क्यों धुआं धुआं....


ऐ मालिक कुछ ऐसा कर

मिटा दूरियां दरमियाँ दिल

वो कह सके मैं सुन सकूँ

वो मुस्कुराएँ फ़िर मुझसे मिल

लौटा दो वही सामो सहर

ईद बकरीद दिवाली होली।।

ये रास्ता क्यों धुआं धुआं.....



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