एक बार सोचकर देखो।
एक बार सोचकर देखो।
जिम्मेदारी स्त्री के हिस्से में ही क्यों आती है?
क्या कभी उसे अपने हिस्से का प्रेम मिलेगा?
क्यों हर वक्त बंट जाती है बेटियां?
न मायका उनका न ससुराल उनका,
क्यों हर वक्त खुद को अकेला पाती है बेटियां?
काम पूरा बिना शिकायत के करती है,
फिर भी हर वक्त तानों को सुनती है,
न मिलती कोई सैलरी फिर भी 24 घंटे काम करती है,
फिर भी कहते सब ज़्यादा खर्चा वो करती है,
जरा सोचो अगर रखे वो हर काम के लिए नौकर,
तो कितना महीने का खर्चा आएगा,
जो वो खुद काम कर बचाती है,
वो लक्ष्मी है जिसका आप करते अपमान हो,
और दूजी ही तरफ,
पैसे कमाने के लिए न जाने क्या क्या करते काम हो,
चौबीस घंटे में न जाने कितने झूठ बोलते हो,
और घर की लक्ष्मी का करते अनादर हो,
याद रखो घर की लक्ष्मी अगर रहती खुश और खुशहाल,
तो घर में होती सुख शांति और समृद्धि की बरसात।
