STORYMIRROR

Dr Baman Chandra Dixit

Inspirational

3  

Dr Baman Chandra Dixit

Inspirational

रुकने से पहले

रुकने से पहले

1 min
227

थक गए होंगे लंबे सफ़र के बाद

रुकना मुनासिब नहीं ये भी मानते

जुनूँ जीने का थकने ना देता कभी

जोश हाज़िर तो थकान भाग जाते।।


रोक नहीं सकता बहाव को कोई

सैलाब को भला कौन टोक सके

तमाम कोशिशें अड़चनें हार गये 

निकला तीर तू, कोई कैसे थाम सके।।


ज़मीन थी तेरी, होगा भी तेरा

छलांग जो भर ली आसमाँ भी तेरा

अलग जलाना तो जला लेते कई

जलाये रखना मकसद हो तेरा।।


अंधेरा है ज़रूर आस उजाले की

जुगनुओं की भांति उड़ते रहने की

पानी में लकीर क्यों खींच नहीं सकते 

ताकते रहो उसके जम जाने तक की।।


कम आंकते जो खुश रहने दो उन्हें

सूरज उगने तक और सुबह होने तक

थकने के बाद, पर रुकने से पहले

खिलेगी रौशनी, दूर आसमाँ तक।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational