STORYMIRROR

निखिल कुमार अंजान

Romance

3  

निखिल कुमार अंजान

Romance

एक अंजान सी लड़की....

एक अंजान सी लड़की....

1 min
256

एक अंजान सी लड़की

थोड़ी हैरान परेशान सी

वो नादान सी लड़की

नटखट शैतानी करने वाली

वो सच्चे ईमान सी लड़की


कब हम मिले थे याद नहीं

पर मेरे हर पल में बसने वाली

एक अंजान सी लड़की 

न उसने कभी कुछ कहा

न मैने ही कुछ सुना

बिन बोले ही मेरी साँसों में

बसने वाली अंजान सी लड़की 


प्यार क्या होता है मैं नहीं

जानता

इश्क के रंग ढंग भी नहीं

पहचानता

न जाने क्यों हर लम्हे का

एहसास

उसकी खुशी के लिए

दुआ मांगता


लगता है उसकी और मेरी

मन की डोर जुड़ गई है

पास न होकर भी हर पल

मेरे साथ वही है

कहूँ या न कहूँ वो अंजान

सी लड़की

मेरी सोलमेट बन गई है.....



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance