एक अंजान सी लड़की....
एक अंजान सी लड़की....
एक अंजान सी लड़की
थोड़ी हैरान परेशान सी
वो नादान सी लड़की
नटखट शैतानी करने वाली
वो सच्चे ईमान सी लड़की
कब हम मिले थे याद नहीं
पर मेरे हर पल में बसने वाली
एक अंजान सी लड़की
न उसने कभी कुछ कहा
न मैने ही कुछ सुना
बिन बोले ही मेरी साँसों में
बसने वाली अंजान सी लड़की
प्यार क्या होता है मैं नहीं
जानता
इश्क के रंग ढंग भी नहीं
पहचानता
न जाने क्यों हर लम्हे का
एहसास
उसकी खुशी के लिए
दुआ मांगता
लगता है उसकी और मेरी
मन की डोर जुड़ गई है
पास न होकर भी हर पल
मेरे साथ वही है
कहूँ या न कहूँ वो अंजान
सी लड़की
मेरी सोलमेट बन गई है.....

