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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Romance Tragedy

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कवि काव्यांश " यथार्थ "

Romance Tragedy

एक अधूरीप्रेम कहानी

एक अधूरीप्रेम कहानी

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किसी मोड़ पर तुमसे मुलाकात हुई,

आंखों में जैसे कोई बात हुई।

शब्द बेमानी, खामोशियां गहरी,

दिल की धड़कन से सांसें जो ठहरी।

तुम थे पास मगर, थे कितने दूर,

समझ न सके हम प्रेम का नूर।

दुनिया की नजरों में हम थे अजनबी,   

दिल के आईने में हम सच्चे साथी।

कोई समझा नहीं, कोई सुन न सका,

हमारी मोहब्बत का गीत रहा अनकहा।

हमने कहने की लाख कोशिशें की,

मगर प्रेम की भाषा न समझा कोई।

वक्त की साजिश, तक़दीर की रीत,

बन न सके हम, एक दूजे के प्रीत।

तुम किसी और के, मैं कहीं और रहा,

फिर भी हमारे दिल का वही छोर रहा।

रातों की तन्हाई, दिन का सूनापन,

हर लम्हा तुम्हारी यादों का दर्पण।

फासले बढ़े, मगर दिल न हारा,

प्रेम अब भी अमर, आज भी हमारा।

ये प्रेम है, कोई सौदा नहीं जनाब

जो हर शर्त पर हो जाए पूरा।

ये अधूरा है, मगर है सच्चा,          

जो जन्मों जन्मों तक रहेगा जिन्दा।



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