STORYMIRROR

परेश पवार 'शिव'

Romance

3  

परेश पवार 'शिव'

Romance

बात कितनी गहरी है

बात कितनी गहरी है

1 min
510

सुना है महकती है तन्हाई भी वहॉं

जब सीने पे उसके तुम सर रखे सोती हो

और यहाँ एक मैं हूँ

मेरी तनहाई है

ये क़लम है, काग़ज़ है


उस पे कुछ आधे अधुरे-से नग़में हैं

और लिखावट को धुँधली बनाती कुछ बूँदें

कुछ काग़ज़ पे बिखरी हैं

कुछ पलकों पे ठहरी हैं


अब क्या बतायें तुम्हें के बात कितनी गहरी है!

कुछ तुम याद करते हो हमें

कुछ हम भूल ना पाये हैं

दिल के ऑंगन में धूप बेशक सुनहरी है..

पर क्या बताये तुम्हें के बात कितनी गहरी है!



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance