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परेश पवार 'शिव'

Tragedy

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परेश पवार 'शिव'

Tragedy

उदासी

उदासी

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मैं छोड़ आता हूँ

अपनी उदासी को कहीं

ये सोचकर के शायद

वो भूल जाये मेरे घर का रास्ता

देर रात तक जगाने वाले ख़्वाबों में

आधी-अधूरी-सी गज़लों में, नग़मों में

बारिश में भीगती मायूस-सी खिडकी में

किसी किताब के मोड़े हुए पन्ने की खामोशी में

अनजान किसी गलीं में,

अकेली सी किसी शाम के दामन में..

और न जाने कहाँ कहाँ

छोड़ आता हूँ मैं उसे

लेकिन पता नहीं कैसे,

पर वो मुझे ढूँढ लेती है हर बार

शायद उदासी से मेरा अकेलापन

सहा नहीं जाता


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